प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के बीच हर्षा रिछारिया सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। उनकी तस्वीरें और वीडियो लगातार शेयर हो रहे हैं, और इस पर चर्चा भी जोरों पर है। हालांकि, कुछ लोग उनकी आस्था पर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। ऐसे में हर्षा ने खुद को साध्वी न मानने की बात कही और इसके पीछे की पूरी कहानी साझा की।
हर्षा ने एक इंटरव्यू में कहा, “मैं साध्वी नहीं हूं। मैंने किसी भी धार्मिक संस्कार को नहीं अपनाया है। इसलिए मुझे साध्वी का टाइटल नहीं दिया जा सकता।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने केवल गुरु दीक्षा और मंत्र दीक्षा ली है, और वह फिलहाल इसका पालन कर रही हैं। हर्षा का कहना है कि उन्होंने अपना जीवन सनातन धर्म के प्रति समर्पित कर दिया है। हर्षा ने बताया की वे केवल कैलाशानंद गिरी की शिष्य है।
कौन है कैलाशानंद गिरी बाबा?

महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज एक सिद्ध महात्मा से साथ साथ सनातन धर्म परचारक है। वें धर्म का प्रचार करने का काम भी करते है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी के शिष्य देश विदेशों में भी है जिनमे एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन भी है जो आजकल प्रयागराज में कैलाशानंद के आश्रम में ही रुकी है।
पढ़िये कौन है वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया?

उत्तराखंड की निवासी हर्षा रिछारिया पहले ग्लैमर की दुनिया में थीं, लेकिन बाद में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। उन्हें स्वामी कैलाशानंद गिरि ने दीक्षा दी और इसके बाद उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बदल लिया। हर्षा का मानना है कि पेशेवर जीवन के दिखावे और आडंबर से भरी जिंदगी ने उन्हें उबाकर वास्तविक सुख और शांति की तलाश में सनातन धर्म की शरण में ला खड़ा किया।
कैसे बनती हैं साध्वी?
साध्वी बनने के लिए महिला को एक कड़ी प्रक्रिया से गुजरना होता है। सबसे पहले, दीक्षा लेने के लिए महिला को संकल्प लेना होता है और उसे कई नियमों का पालन करना पड़ता है। साध्वी बनने के बाद, उसे ताउम्र भगवा वस्त्र पहनने होते हैं। इसके अलावा, उसे शराब, मांसाहारी भोजन से दूर रहना होता है और सिर्फ सादा, उबला हुआ खाना ही खाना पड़ता है।
साध्वी बनने से पहले महिला की घर की स्थिति और जन्म कुंडली भी खंगाली जाती है। साथ ही, उसे यह साबित करना होता है कि वह अब अपने परिवार और समाज से अलग हो चुकी है और अब केवल साधना और धार्मिक कार्यों में लीन है।
इस तरह से, साध्वी बनने के लिए एक कठोर प्रक्रिया और पूरी तरह से समर्पण की आवश्यकता होती है।
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