प्रयागराज में 13 जनवरी से लगने वाला कुंभ 2025 क्यों है खास?, देखिये कितने प्रकार के होते है कुंभ।
महाकुंभ सनातन परंपरा का सबसे बड़ा धर्म की आस्था का प्रतीक है। महाकुंभ मे देश विदेश से करोड़ों की संख्या मे श्रद्धालु आते है। इस बार महाकुंभ मे लगभग 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हजारों करोड़ रुपये की लागत से सुविधाओं के सभी इंतजाम किए है।
जानिए क्यों है इस बार महाकुंभ खास।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस बार महाकुंभ इसलिए भी खास है क्योंकि सूर्य, चंद्रमा, शनि और बृहस्पति ग्रहों की स्थिति 144 वर्षों पहले का संयोग दोहराने जा रही है। यह संयोग देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुन्द्र मंथन के समय का ही बताया जा रहा है। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार महाकुंभ का ये समय बहुत ही शुभ माना जाता है। महाकुंभ के इस समय पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है। इस बार के महाकुंभ में की जाने वाली सभी धार्मिक पूजा अर्चना का लाभ बहुत की जल्दी प्राप्त होता है।
देखिये कितने प्रकार के होते है कुंभ।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों द्वारा अमृत प्राप्ति के लिए समुन्द्र मंथन किया गया तब समुन्द्र मंथन के समय देवताओं और असुरों के बीच अमृत के लिए युद्द भी हुआ। इस युद्द के दौरान अमृत की कुछ बुँदे धरती पर चार स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नाशिक में गिरि थी जिस कारण इन चारों स्थानों पर ही कुम्भ का आयोजन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुम्भ तीन प्रकार का होता है। महाकुंभ, पूर्णकुंभ व अर्धकुंभ।
क्यों मनाया जाता है 12 साल बाद महाकुंभ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने मंथन करके अमृत को निकाला, उसी समय अमृत के बँटवारे को लेकर देवताओं और असुरों के बीच युद्द हुआ। युद्ध जीतने के बाद देता अमृत को लेकर स्वर्ग चले गए। माना जाता है की धरती से स्वर्ग जाने मे देवताओं को 12 दिन का समय लग गया था। देवताओं का 1 दिन धरती के 1 साल के बराबर होता है। इस लिए ही प्रत्येक 12 वर्षों के बाद ही महाकुंभ आयोजित होता है।
यें है महाकुंभ के स्नान की विशेष तिथियाँ।
13 जनवरी: पौष पुर्णिमा से शुरू
14 जनवरी: मकर संक्रांति पर पहला शाही स्नान
29 जनवरी: मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान
3 फरवरी: बसंत पंचमी पर तीसरा शाही स्नान
4: फरवरी: अचला सप्तमी
12 फरवरी: माघ पुर्णिमा
26 फरवरी: महाशिवरात्री पर अंतिम स्नान
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इस बार सबसे बड़ा महाकुभ उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से कुंभ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए हजारों करोड़ का बजट लगाया गया है। राज्य सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार ने भी कुम्भ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए अपना योगदान दिया है। संगम स्थान पर तीन नदियां आकार मिलती है जो गंगा, यमुना और सरसवती, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तीन धाराओं के दर्शन किसी भाग्यसाली व्यक्ति को ही प्राप्त होते है। महाकुंभ में देश भर के दूर दराज के इलाकों पहाड़ों से साधू संत आकार महाकुंभ में स्नान करते है।