अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनावों के नतीजों में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई है। किसी ने पहली बार जीत दर्ज कर इतिहास बनाया, तो किसी ने अपनी सीट बरकरार रखी। वहीं, एक चर्चित भारतीय-अमेरिकी नेता को गवर्नर पद की दौड़ में हार का सामना करना पड़ा। आखिर किस उम्मीदवार को मिली जीत और किसे करना पड़ा हार का सामना? आगे पढ़ें पूरी खबर।

पिया डंडिया ने फ्लोरिडा में बनाया इतिहास
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डंडिया ने जीत दर्ज की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। इस जीत के साथ वह फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी बन गई हैं।
पिया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षिका और हाईस्कूल प्रिंसिपल के रूप में काम कर चुकी हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस फेलो के तौर पर भी सेवाएं दी हैं। उनके चुनावी अभियान में शिक्षा, महंगाई और आर्थिक अवसर जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
सुहास सुब्रमण्यम ने बरकरार रखी अपनी सीट
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार सुहास सुब्रमण्यम ने एक बार फिर जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल सुनिश्चित किया।
चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, सुहास को करीब 63.16 प्रतिशत वोट मिले, जबकि डेव बेकविथ के खाते में 34.66 प्रतिशत मत आए। सुहास 2024 में पहली बार कांग्रेस के लिए चुने गए थे। वह वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं।
अरुणा मिलर ने भी दोहराई जीत
मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी दोबारा जीत दर्ज की। वह डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव मैदान में थीं। दोनों ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हराकर अपना दूसरा कार्यकाल हासिल किया।
भारत में जन्मीं अरुणा मिलर अमेरिका में भारतीय मूल की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हैं। उनकी जीत के साथ मैरीलैंड के राज्य प्रशासन में उनका प्रतिनिधित्व जारी रहेगा।
विवेक रामास्वामी को ओहायो में झटका
ओहायो के गवर्नर पद के चुनाव में भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को हार का सामना करना पड़ा। वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।
रामास्वामी कारोबारी होने के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार भी रह चुके हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त था, लेकिन इसके बावजूद वह गवर्नर पद की दौड़ में जीत हासिल नहीं कर सके।
कई अन्य भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार भी मैदान में
मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों की किस्मत भी दांव पर रही। इनमें अमिश शाह, रो खन्ना, एमी बेरा, प्रमिला जयपाल, नित्या रमन और सरिता कोमारेड्डी जैसे नाम शामिल हैं।
अलग-अलग सीटों पर मतगणना और नतीजों की स्थिति अलग रही। ऐसे में सभी उम्मीदवारों की जीत या हार को एक साथ घोषित करना सही नहीं होगा।
क्या होते हैं अमेरिका के मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच, यानी लगभग दो साल बाद होने वाले चुनावों को मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान होता है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर और राज्य विधानसभाओं के चुनाव भी कराए जाते हैं।
मिडटर्म चुनावों के नतीजे अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों की स्थिति को प्रभावित करते हैं। वर्ष 2026 के ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच हुए हैं।

