एक समय था जब ब्रेन स्ट्रोक को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में सामने आए आंकड़े इस खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। 20, 30 और 40 साल की उम्र के लोगों में भी स्ट्रोक के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसे कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं। आखिर क्यों युवाओं में बढ़ रहा है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा और किन शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है? आगे पढ़ें पूरी खबर।

हर सात में से एक स्ट्रोक मरीज 45 साल से कम उम्र का
ICMR की नेशनल स्ट्रोक रजिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में स्ट्रोक के लगभग 13.8 प्रतिशत मरीज 18 से 44 साल की उम्र के हैं। यह आंकड़ा 30 अस्पतालों में 2020 से 2022 के दौरान दर्ज 34,792 मरीजों के विश्लेषण पर आधारित है।
डॉक्टरों के मुताबिक, युवाओं में बढ़ते जोखिम के पीछे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारण हो सकते हैं।
आखिर क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक?
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। यह तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से तक खून की सप्लाई रुक जाती है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं।
स्ट्रोक मुख्य रूप से दो तरह का होता है:
1. इस्केमिक स्ट्रोक: इसमें दिमाग तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में थक्का या रुकावट आ जाती है।
2. हेमरेजिक स्ट्रोक: इसमें दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क में खून बहने लगता है।
दोनों ही स्थितियों में तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत होती है।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ ऐसी आदतें और स्वास्थ्य समस्याएं हैं जो कम उम्र में भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
– हाई ब्लड प्रेशर: लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप दिमाग की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
– डायबिटीज: ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है।
– मोटापा और खराब खानपान: असंतुलित डाइट और बढ़ता वजन कई बीमारियों का जोखिम बढ़ाते हैं।
– धूम्रपान: तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं और हृदय संबंधी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
– शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
– तनाव और खराब नींद: लंबे समय तक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना भी समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
कुछ लोगों में हृदय संबंधी समस्याएं, रक्त वाहिकाओं की असामान्यताएं और खून जमने से जुड़ी स्थितियां भी स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं।
इन 6 संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
स्ट्रोक के लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं। इन्हें पहचानने के लिए डॉक्टर BE FAST फॉर्मूला याद रखने की सलाह देते हैं।
– B – Balance: अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना या चलने में परेशानी।
– E – Eyes: अचानक धुंधला दिखना या नजर में बदलाव।
– F – Face: चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना या मुस्कान टेढ़ी होना।
– A – Arms: एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।
– S – Speech: बोलने में परेशानी, आवाज लड़खड़ाना या बात समझने में दिक्कत।
– T – Time: समय बर्बाद न करें, तुरंत मेडिकल इमरजेंसी सहायता लें।
इनमें से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे तो इसे थकान, तनाव या सामान्य कमजोरी समझकर टालना खतरनाक हो सकता है।
लक्षण ठीक हो जाएं तब भी न करें लापरवाही
कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक होते दिखाई देते हैं। लेकिन इसे खतरे का टल जाना नहीं समझना चाहिए। यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकता है, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में भी तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है, क्योंकि यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। घरेलू उपचार या खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं।
स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ सावधानियां अपनाकर स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
– नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।
– ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें।
– संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
– रोजाना शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
– धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
– पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
– डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
इलाज में देरी पड़ सकती है भारी
स्ट्रोक के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। कुछ मरीजों में, जांच के बाद डॉक्टर खून का थक्का घोलने वाली दवा देने पर विचार कर सकते हैं। इसके लिए आमतौर पर लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर इलाज शुरू करना महत्वपूर्ण होता है। कुछ चुनिंदा मरीजों में विशेष प्रक्रिया के जरिए थक्का निकालने का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
इसलिए स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर खुद इलाज करने या इंतजार करने के बजाय तुरंत एंबुलेंस बुलाएं और ऐसे अस्पताल पहुंचें जहां स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो।

