करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, शाम को चंद्रमा के दर्शन करने, उन्हें अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है। लेकिन इस बार दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में बारिश और आसमान में छाए बादलों के कारण चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में सवाल है कि अगर चांद नजर न आए तो व्रत कैसे खोलें? क्या चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य दिया जा सकता है? आइए जानते हैं पूजा की पूरी विधि और पारण के विकल्प। आगे पढ़ें पूरी खबर।

चांद नहीं दिखे तो सबसे पहले क्या करें?
अगर करवा चौथ की रात बारिश या घने बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो सबसे पहले कुछ समय तक आसमान साफ होने का इंतजार करें। अपने शहर का चंद्रोदय समय भी जांच लें, क्योंकि चांद निकलने का समय और उसका आंखों से दिखाई देना अलग-अलग बातें हैं।
दिल्ली में 29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:17 बजे है। मौसम और बादलों के कारण चांद इसके बाद भी दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
यदि काफी इंतजार के बाद भी चंद्रमा नजर न आए, तो जल्दबाजी करने के बजाय अपने परिवार की परंपरा या पंडित की सलाह के अनुसार पूजा और व्रत पारण की विधि अपनाएं।
चांद दिखाई न देने पर व्रत खोलने के क्या हैं विकल्प?
1. चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देकर पूजा करें
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देने पर स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रोदय समय पर चंद्रमा की दिशा की ओर मुख करके उनका स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद जल से अर्घ्य देकर प्रार्थना की जाती है।
ध्यान रखें कि यह तरीका सभी परिवारों और परंपराओं में समान रूप से मान्य नहीं है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्णय लें।
2. चंद्रदेव का प्रतीक बनाकर करें पूजा
कुछ धार्मिक मार्गदर्शनों में चंद्रमा के दर्शन न होने पर पूजा की थाली में सफेद चंदन से चंद्रमा की आकृति बनाने का विकल्प बताया गया है।
इसके लिए आप ये चीजें कर सकती हैं:
– एक साफ पूजा की थाली लें।
– थाली में सफेद चंदन से चंद्रमा की आकृति बनाएं।
– उसके आसपास अक्षत यानी साबुत चावल और सफेद फूल रखें।
– चंद्रदेव का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें।
– अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्घ्य देने की विधि पूरी करें।
कुछ मान्यताओं में इस दौरान ‘ॐ चंद्राय नमः’ और ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का जाप भी किया जाता है। इस विधि को सभी के लिए अनिवार्य या सर्वमान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।
3. पति के दर्शन करके खोलने की परंपरा
कुछ परिवारों में ऐसी परिस्थिति में पति का चेहरा देखकर और उनके हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस दौरान चंद्रदेव का स्मरण करके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।
हालांकि, चंद्रमा के दर्शन के बिना व्रत खोलने की यह विधि हर जगह एक जैसी नहीं है। इसलिए परिवार में चली आ रही मान्यता के अनुसार ही इसका पालन करें।
4. क्या मोबाइल पर चांद की तस्वीर देखकर खोल सकते हैं व्रत?
कई महिलाओं के मन में यह सवाल भी आता है कि क्या मोबाइल पर चंद्रमा की तस्वीर या वीडियो देखकर व्रत खोला जा सकता है। इस विषय में सभी परंपराओं में एक जैसी मान्यता नहीं है।
इसलिए केवल किसी दूसरी जगह की तस्वीर या वीडियो देखकर व्रत खोलने को सर्वमान्य विकल्प नहीं कहा जा सकता। यदि आपके यहां चंद्र दर्शन को लेकर विशेष नियम हैं, तो परिवार के बुजुर्गों या पंडित से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
करवा चौथ की पूजा की पूरी विधि
करवा चौथ पर पूजा की विधि को परंपरागत रूप से इन चरणों में पूरा किया जाता है:
पहला चरण: पूजा की तैयारी
शाम को स्नान करके स्वच्छ या पारंपरिक वस्त्र पहनें। पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई, छलनी और करवा रखें। पूजा की सामग्री अपने परिवार की परंपरा के अनुसार तैयार करें।
दूसरा चरण: करवा चौथ माता की पूजा
पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा चौथ माता का स्मरण करें। दीपक जलाएं, रोली और अक्षत अर्पित करें तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें।
तीसरा चरण: व्रत कथा सुनें
करवा चौथ की पारंपरिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा के बाद श्रद्धापूर्वक पूजा करें और परिवार की मान्यता के अनुसार करवा से जुड़ी रस्में पूरी करें।
चौथा चरण: चंद्रमा को अर्घ्य दें
चांद दिखाई देने पर छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें और फिर पति का चेहरा देखें। परंपरा के अनुसार चंद्रदेव को जल अर्पित करके प्रार्थना करें।
पांचवां चरण: व्रत का पारण करें
पूजा पूरी होने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करने और भोजन करने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
यदि चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहा हो, तो पारण से पहले अपनाई जाने वाली वैकल्पिक विधि अपनी पारिवारिक मान्यता के अनुसार तय करें।
करवा चौथ पर इन बातों का रखें ध्यान
– अपने शहर का चंद्रोदय समय जांचें।
– बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहकर पूजा करें।
– चांद दिखाई न देने पर अलग-अलग इंटरनेट दावों को अंतिम धार्मिक नियम न मानें।
– व्रत पारण की विधि को लेकर असमंजस हो तो परिवार के बुजुर्गों या पंडित से सलाह लें।
– निर्जला व्रत के दौरान तबीयत खराब हो, चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें।
करवा चौथ पर हर परिवार की मान्यता अलग होती है
करवा चौथ आस्था, परंपरा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ा पर्व है। चंद्रमा के दर्शन न होने पर व्रत खोलने के तरीकों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए किसी एक विधि को सभी के लिए अनिवार्य बताने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

