कई बार व्यक्ति रात को बिल्कुल सामान्य हालत में सोता है, लेकिन सुबह उठने पर उसके शरीर में अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसी स्थिति को ‘वेक-अप स्ट्रोक’ कहा जाता है। इसमें स्ट्रोक नींद के दौरान हो सकता है और व्यक्ति को सुबह जागने पर इसके लक्षण महसूस होते हैं। समय पर इलाज न मिलने से दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। आखिर क्या है वेक-अप स्ट्रोक, इसके लक्षण कैसे पहचानें और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? आगे पढ़ें पूरी खबर।

क्या होता है वेक-अप स्ट्रोक?
वेक-अप स्ट्रोक, स्ट्रोक का वह प्रकार है जिसमें व्यक्ति सोते समय इसकी चपेट में आ सकता है और सुबह जागने पर लक्षण दिखाई देते हैं। स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से तक खून की आपूर्ति रुक जाती है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। खून और ऑक्सीजन की कमी से दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
इस स्थिति में चुनौती यह होती है कि स्ट्रोक की शुरुआत का सही समय पता नहीं चल पाता। ऐसे में डॉक्टर जांच के आधार पर तय करते हैं कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार उपयुक्त है।
वेक-अप स्ट्रोक के कौन-से लक्षण दिखते हैं?
वेक-अप स्ट्रोक के लक्षण सामान्य स्ट्रोक जैसे ही हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
– चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाना।
– एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, खासकर शरीर के एक तरफ।
– बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी।
– अचानक दिखाई देने में दिक्कत।
– चलने में परेशानी, चक्कर या शरीर का संतुलन बिगड़ना।
– बिना स्पष्ट वजह के अचानक तेज सिरदर्द।
– अचानक भ्रम की स्थिति पैदा होना।
इनमें से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे, तो इसे थकान या नींद का असर समझकर नजरअंदाज न करें।
सुबह उठने पर लक्षण दिखें तो क्या करें?
स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
डॉक्टरों को यह बताना जरूरी है कि व्यक्ति आखिरी बार कब सामान्य अवस्था में देखा गया था और सुबह उठने पर कौन-से लक्षण नजर आए। इससे इलाज का फैसला लेने में मदद मिलती है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए।
किन लोगों में स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है?
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और दिल से जुड़ी कुछ बीमारियां स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। धूम्रपान भी एक जोखिम कारक है। हालांकि, किसी व्यक्ति में जोखिम होने का मतलब यह नहीं कि उसे स्ट्रोक जरूर होगा।
वेक-अप स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?
स्ट्रोक का जोखिम कम करने के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, संतुलित भोजन करें और शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। धूम्रपान से बचना भी फायदेमंद है।

