दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पराली जलाने से उठने वाला धुआं राजधानी की हवा को और जहरीला बना रहा है। अब दिवाली पर पटाखों से प्रदूषण बढ़ने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है। 4 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 350 दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। आगे पढ़ें पूरी खबर।

दिल्ली में 287 दिनों का सबसे खराब AQI
दिल्ली में 3 नवंबर को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 350 तक पहुंच गया। यह पिछले 287 दिनों में राजधानी का सबसे खराब स्तर रहा। इससे पहले 20 जनवरी को AQI 378 दर्ज किया गया था।
शहर के 57 निगरानी केंद्रों में से 10 पर हवा गंभीर श्रेणी में रही, जबकि 35 केंद्रों पर बेहद खराब और 12 केंद्रों पर खराब स्तर दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी में AQI 462 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
पराली के धुएं से बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली की हवा बिगड़ने के पीछे पराली जलाने से निकलने वाले धुएं को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में खेतों में आग लगाने की घटनाओं से निकलने वाला धुआं हवा के साथ दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दिनों पराली के धुएं का प्रदूषण में योगदान बढ़ा है। कम हवा की रफ्तार और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
दिवाली के पटाखे बढ़ा सकते हैं परेशानी
इस बार दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से प्रदूषित हवा की स्थिति को और बिगाड़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि पराली के धुएं और पटाखों के उत्सर्जन का संयुक्त असर दिल्ली के AQI को 400 के पार पहुंचा सकता है।
AQI 401 से 500 के बीच होने पर हवा गंभीर श्रेणी में मानी जाती है। हालांकि, प्रदूषण का वास्तविक स्तर मौसम, हवा की दिशा और उत्सर्जन की मात्रा पर निर्भर करेगा।
अगले कुछ दिन हवा से राहत मिलने की उम्मीद कम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की कम रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं होने से प्रदूषण बढ़ सकता है। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली ने भी आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में बने रहने का अनुमान जताया है।
3 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया गया। इसके तहत सड़कों की मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के उपाय तेज किए जाते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी परेशानी वाले लोगों पर पड़ सकता है। PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण बढ़ने पर बाहर लंबे समय तक रहने और खुले में भारी व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
दिवाली से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पहले ही बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुका है। अब पराली जलाने की घटनाओं, मौसम की परिस्थितियों और दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण बड़ी चुनौती होगी। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता किस स्तर तक बिगड़ती है, यह काफी हद तक मौसम और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर निर्भर करेगा।

