नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। ताजा खुफिया इनपुट और लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उनके नई दिल्ली स्थित आवास के बाहर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को पहले से ही Z+ सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा का अतिरिक्त घेरा बनाया गया है।
घर से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक सुरक्षा बढ़ी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, स्थानीय जिला पुलिस को भी अपने स्तर पर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग के कार्यालय यानी निर्वाचन सदन के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई है। गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के बीच दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 221 कंपनियां उपलब्ध कराई हैं, जिनमें करीब 23 हजार जवान शामिल बताए जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल कानून-व्यवस्था संभालने, प्रदर्शन वाले क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
क्या होती है Z+ सुरक्षा?
Z+ भारत में दी जाने वाली सबसे ऊंची नागरिक सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। सुरक्षा का स्तर किसी व्यक्ति को मिले खतरे के आकलन के आधार पर तय किया जाता है। प्रधानमंत्री और उनके परिवार के लिए SPG सुरक्षा अलग श्रेणी है, जबकि Z+ कवर अन्य बेहद महत्वपूर्ण और खतरे वाले व्यक्तियों को दिया जा सकता है। Z+ सुरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों में होती है। इसमें व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा, घर की सुरक्षा, आवाजाही के दौरान सुरक्षा और आसपास के क्षेत्र की निगरानी शामिल हो सकती है। अलग-अलग ड्यूटी और शिफ्ट में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा में पहले से ही 50 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था थी और अब अतिरिक्त बल लगाया गया है।
दिल्ली में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ा है। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारी संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और नामों को हटाने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल हैं। इसी मुद्दे को लेकर INDIA ब्लॉक के नेताओं ने दिल्ली में प्रदर्शन किया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता हाल के प्रदर्शनों में शामिल हुए और पुलिस ने कुछ नेताओं को हिरासत में भी लिया। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन को वैध प्रक्रिया के तहत बताया गया है।
10 अक्टूबर को कौन-कौन करेगा प्रदर्शन?
अब दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी तैयारियां तेज हैं। इस प्रदर्शन का आह्वान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों ने किया है। आयोजकों ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना भी दी है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन में कई छात्र और युवा संगठन शामिल होने की बात कह चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से: AISA, SFI, AISF, ASAP, DYFI, AIYF, RYA, RYF, AIDYO, AIYL जैसे संगठन शामिल हैं। आयोजकों की प्रमुख मांगों में SIR प्रक्रिया को वापस लेने, चुनावी व्यवस्था में सुधार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है। कुछ संगठनों ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव की भी मांग उठाई है।
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस अलर्ट
10 अक्टूबर के कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े नियमों और अनुमति की शर्तों को लेकर भी स्पष्टता दी है। जंतर-मंतर पर किसी भी प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है और भीड़ की संख्या पर भी सीमा लागू है। लगातार विरोध-प्रदर्शनों और 10 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में CEC ज्ञानेश कुमार के आवास से लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय और प्रदर्शन स्थल तक सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है।
CEC ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ाए जाने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब SIR को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के चलते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त रहने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदर्शन किस तरह आगे बढ़ता है और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

