बीजामंडल: जिसकी तर्ज पर बनी नई संसद की डिजाइन, आज तालों में कैद ऐतिहासिक धरोहर
विदिशा। शहर का ऐतिहासिक विजय मंदिर, जिसे स्थानीय रूप से बीजामंडल कहा जाता है, विदिशा की पहचान और मध्यभारत की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। विशाल संरचना और अद्भुत स्थापत्य कला के कारण यह स्मारक देशभर में चर्चा का विषय रहा है। दावा किया जाता है कि नई संसद भवन की डिजाइन में भी बीजामंडल की स्थापत्य शैली से प्रेरणा ली गई है। इसके बावजूद विदिशा की यह ऐतिहासिक धरोहर आज भी बंद दरवाजों के पीछे है।
प्राचीन वेदिशा, बेसनगर और भेलसा के नाम से पहचाने जाने वाले विदिशा में स्थित इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मंदिर परिसर की विशालता और स्थापत्य इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। ऊंचे चबूतरे पर बने मंदिर में चारों दिशाओं से सीढ़ियां थीं। परिसर में प्राचीन प्रतिमाओं और स्थापत्य अवशेषों के साथ बेल-बूटों तथा यक्ष-यक्षिणियों की आकृतियां भी देखने को मिलती हैं।
दशकों से विवादों में रहा बीजामंडल
बीजामंडल लंबे समय से विवादों में रहा है। 1947 से 1964 के बीच मंदिर पर अधिकार को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद परिसर में पूजा और नमाज दोनों पर रोक लगा दी गई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मंदिर का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया।
1992 के समझौते के बाद हर नागपंचमी पर बाहर से प्रतीकात्मक पूजा की अनुमति दिए जाने की बात सामने आती रही है। वर्ष 2024 में गर्भगृह में पूजा की अनुमति, दोबारा सर्वे कराने और रिकॉर्ड में दर्ज ‘मस्जिद’ शब्द को हटाने की मांग भी उठी थी। हालांकि एएसआई ने 1951 की गजट का हवाला देते हुए पूजा की अनुमति नहीं दी।
1991 में दीवार गिरी, सामने आया प्राचीन खजाना
1991 में भारी बारिश के दौरान बीजामंडल की एक दीवार गिरने के बाद करीब 300 साल से बंद तहखाने और गलियारे सामने आए। यहां से 100 से अधिक प्राचीन मूर्तियां मिलने की जानकारी सामने आई। एएसआई ने वैज्ञानिक तरीके से खुदाई शुरू की। इस दौरान महिषासुरमर्दिनी, अष्टभुजी गणेश, सप्तमातृका पैनल, उमा-महेश्वर, विष्णु-लक्ष्मी, सूर्यदेव और कार्तिकेय सहित कई प्रतिमाएं मिलीं। कुछ प्रतिमाएं करीब आठ फीट तक ऊंची थीं।
करीब एक महीने बाद खुदाई रोक दी गई और 1993-94 में उत्खनन पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद दोबारा खुदाई शुरू नहीं हो सकी।
ताला खुलवाने लगातार प्रयास कर रहे हिंदू संगठन
ऐतिहासिक विजय मंदिर का ताला खुलवाने और मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू कराने की मांग को लेकर हिंदू संगठन लगातार प्रयास कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि बीजामंडल केवल ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि विदिशा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा स्थल है। श्रद्धालुओं को मंदिर के दर्शन और पूजा का अवसर मिलना चाहिए।
हिंदू संगठनों की ओर से इस मांग को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग के समक्ष लगातार आवाज उठाई जा रही है। संगठन मंदिर के इतिहास और उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए विजय मंदिर के बंद दरवाजे खोलने की मांग कर रहे हैं।
इतिहास, स्थापत्य और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बीजामंडल आज भी अपने संरक्षण, शोध और उचित पहचान की प्रतीक्षा कर रहा है। अब नजर इस बात पर है कि विजय मंदिर का ताला खुलवाने की मांग को लेकर चल रहे प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
जितेंद्र शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार

